चिन्मय मिशन के वैश्विक सम्मेलन का भव्य समापन, चिन्मय मूवमेंट के 75 वर्षों की ऐतिहासिक यात्रा का उत्सव

देहरादून। चिन्मय मिशन ने आज नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित तीन दिवसीय चिन्मय अमृत महोत्सव वैश्विक सम्मेलन का समापन किया। यह सम्मेलन चिन्मय मूवमेंट के 75 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित वर्षभर के समारोहों का समापन था। भारत और विदेशों से आए 9,000 से अधिक प्रतिभागियों ने इसमें हिस्सा लिया। सम्मेलन के माध्यम से पूज्य गुरुदेव स्वामी चिन्मयानंद की चिरस्थायी विरासत का उत्सव मनाया गया। आध्यात्मिक प्रवचनों, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, विभिन्न पीढ़ियों के बीच संवाद और अनुभवात्मक गतिविधियों के जरिए मिशन के दार्शनिक मूल्यों को समकालीन जीवन से जोड़ने का प्रयास किया गया।
सम्मेलन का उद्घाटन 23 अक्टूबर को माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने किया। उन्होंने गुरुदेव की शिक्षाओं को युवा पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए मिशन के प्रयासों की सराहना की और राष्ट्र निर्माण में युवा शक्ति की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। तीन दिवसीय इस आयोजन के समापन दिवस पर माननीय विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और भारत में संयुक्त राष्ट्र के रेजिडेंट कोऑर्डिनेटर स्टीफन प्रीस्नर भी शामिल हुए। सम्मेलन में लगभग 80 राजदूतों के विशिष्ट प्रतिनिधिमंडल की उपस्थिति भी रही। यह आयोजन की अंतरराष्ट्रीय पहुंच और विभिन्न समुदायों तथा देशों के बीच संवाद एवं आपसी समझ को बढ़ावा देने में वेदांत दर्शन की प्रासंगिकता को दर्शाता है।
उद्घाटन समारोह में चिन्मय अमृत यात्रा की उल्लेखनीय यात्रा का भी उत्सव मनाया गया। यह 300 दिनों की आध्यात्मिक यात्रा थी, जिसने भारत, नेपाल और श्रीलंका में लगभग 40,000 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए गुरुदेव की शिक्षाओं को क्षेत्र के विभिन्न समुदायों तक पहुंचाया। 31 दिसंबर 2025 को पुणे स्थित चिन्मय विभूति से शुरू हुई इस यात्रा के दौरान गुरुदेव की शिक्षाओं, पवित्र वस्तुओं और अभिलेखीय सामग्री को विभिन्न स्थानों तक ले जाया गया। यात्रा ने प्रार्थना, ज्ञानार्जन और सेवा के माध्यम से लोगों को एक साथ जोड़ने का काम किया।
तीन दिवसीय सम्मेलन में आध्यात्मिक चिंतन, युवाओं की भागीदारी, प्रौद्योगिकी और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति के माध्यम से स्वामी चिन्मयानंद की विरासत और चिन्मय मूवमेंट की 75 वर्षों की यात्रा का उत्सव मनाया गया। बच्चों के लिए विशेष शिशु विहार और बाल विहार सत्रों से लेकर अनुभवात्मक चिन्मय अमृत गंगा प्रदर्शनी, होलोबॉट अनुभव और मिशन की पहलों को प्रदर्शित करने वाले वर्चुअल रियलिटी अनुभवों तक, प्रतिभागियों को गुरुदेव की शिक्षाओं से जुड़ने के विविध अवसर मिले। समारोह में ग्रैमी पुरस्कार विजेता संगीतकार रिकी केज का संगीत कार्यक्रम और फिल्म निर्माता मणि शंकर के निर्देशन में प्रस्तुत ‘द चिन्मय म्यूजिकल – द अवेकनिंग’ भी शामिल रहे। संगीत, नृत्य और कहानी कहने की कला के माध्यम से इन प्रस्तुतियों ने गुरुदेव के जीवन और उनके दृष्टिकोण को जीवंत किया।
तीन दिवसीय कार्यक्रम में आध्यात्मिक ज्ञान के साथ सांस्कृतिक और अनुभवात्मक गतिविधियों का भी समावेश रहा। पूज्य स्वामी तेजोमयानंद ने भगवद्गीता पर प्रवचन दिए। वहीं, चिन्मय मिशन के वैश्विक प्रमुख पूज्य स्वामी स्वरूपानंद ने उपनिषदों पर प्रवचन और निर्देशित ध्यान सत्र का संचालन किया। इन सत्रों ने प्रतिभागियों को वेदांत दर्शन को समझने और दैनिक जीवन में उसकी प्रासंगिकता पर विचार करने का अवसर दिया।
समापन दिवस पर समापन समारोह और पूज्य स्वामी तेजोमयानंद के नेतृत्व में आयोजित भक्ति संध्या के साथ तीन दिवसीय सम्मेलन संपन्न हुआ। इस सम्मेलन का समापन मिशन की 75 वर्षों की यात्रा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव रहा। इसने गुरुदेव के दृष्टिकोण से प्रेरित मिशन के आध्यात्मिक, शैक्षणिक, सांस्कृतिक और सेवाभावी कार्यों को एक साझा उत्सव के रूप में प्रस्तुत किया।
इस महत्वपूर्ण पड़ाव और इसके स्थायी वैश्विक प्रभाव पर चिन्मय मिशन के वैश्विक प्रमुख पूज्य स्वामी स्वरूपानंद ने कहा, “भारत और दुनिया के विभिन्न हिस्सों से लोगों को चिन्मय मूवमेंट के 75 वर्ष पूरे होने का उत्सव मनाने और पूज्य गुरुदेव स्वामी चिन्मयानंद के दृष्टिकोण से दोबारा जुड़ने के लिए एक साथ आते देखना अत्यंत हर्ष का विषय रहा। उद्घाटन दिवस पर माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति और डॉ. एस. जयशंकर तथा संयुक्त राष्ट्र के स्टीफन प्रीस्नर जैसे विशिष्ट व्यक्तित्वों की भागीदारी ने इस महत्वपूर्ण अवसर को और भी विशेष बना दिया। उनकी सहभागिता आज के समय में गुरुदेव की शिक्षाओं और वेदांत के मूल्यों की निरंतर प्रासंगिकता को दर्शाती है। सम्मेलन के समापन और चिन्मय अमृत यात्रा के पूर्ण होने के साथ, हमारा संकल्प और मजबूत हुआ है कि इस ज्ञान को अधिक से अधिक लोगों, विशेषकर युवा पीढ़ी तक पहुंचाया जाए और सेवा तथा करुणा के माध्यम से इसे सार्थक कार्यों में बदला जाए।”




